जालौन के कुसमिलिया गांव में भीषण अग्निकांड: 25 परिवारों के आशियाने खाक, जिलाधिकारी ने खुद संभाली कमान, बांटी राहत सामग्री

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उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कुसमिलिया गांव में भीषण आग लगने के बाद जले हुए मकानों का निरीक्षण करते जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और प्रशासनिक अधिकारी, साथ में राहत सामग्री प्राप्त करते पीड़ित ग्रामीण।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन। जनपद के डकोर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कुसमिलिया में सोमवार की शाम उस वक्त चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई, जब अज्ञात कारणों से अचानक भीषण आग भड़क उठी। तेज हवाओं के चलते आग की लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते गांव के कच्चे मकानों, छप्परों, भूसे के ढेरों और घरों में रखे सामान को अपनी चपेट में ले लिया। आग की विभीषिका इतनी भयानक थी कि ग्रामीणों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। ग्रामीणों और दमकल कर्मियों ने भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि समय रहते किए गए प्रयासों के चलते इस भयानक हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन संपत्तियों और आशियानों को भारी नुकसान पहुंचा है।

मुख्य बिंदु:

  • ​डकोर विकासखंड के कुसमिलिया गांव में सोमवार शाम अज्ञात कारणों से भड़की भीषण आग।
  • ​25 से अधिक परिवार हुए प्रभावित, 17 आशियाने पूरी तरह जलकर हुए जमींदोज।
  • ​कोई जनहानि नहीं; प्रशासन, दमकल और ग्रामीणों की तत्परता से टला बड़ा हादसा।
  • ​जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने किया गांव का दौरा, पीड़ितों के लिए शुरू कराया लंगर।

17 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त, राजस्व विभाग ने तैयार की रिपोर्ट

​प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस भीषण अग्निकांड में गांव के करीब 25 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें से 17 परिवारों के मकान और उनके भीतर रखी पूरी गृहस्थी जलकर खाक हो गई है। पीड़ितों के कपड़े, खाद्यान्न, बर्तन, दैनिक उपयोग की सामग्री और मवेशियों के लिए रखा भूसा पूरी तरह जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गया।

​घटना की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी (SDM) ज्योति सिंह तत्काल प्रशासनिक और राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने राहत कार्यों की निगरानी की और पीड़ितों को सांत्वना दी। राजस्व टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए रात में ही नुकसान का विस्तृत सर्वे किया और मंगलवार सुबह तक अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी।

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने गांव पहुंचकर बंधाया ढांढस

​मंगलवार को रिपोर्ट मिलते ही जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय स्वयं कुसमिलिया गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया और एक-एक पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका हाल जाना। जिलाधिकारी ने भावुक और बेघर हुए ग्रामीणों को ढांढस बंधाते हुए कहा:

​”इस संकट की घड़ी में प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ आपके साथ खड़ा है। किसी भी पीड़ित को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

​जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वित्तीय सहायता और अन्य सरकारी लाभों की प्रक्रिया को बिना किसी विलंब के तत्काल पूरा किया जाए, ताकि प्रभावित परिवार जल्द से जल्द अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई: गांव में लंगर शुरू, बांटी गई दैनिक उपयोगी सामग्री

​अग्निकांड के बाद बेघर हुए परिवारों के सामने सबसे बड़ा संकट भोजन और पानी का था। प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए गांव में ही तत्काल एक सामुदायिक लंगर (रसोई) की शुरुआत कराई, ताकि कोई भी प्रभावित व्यक्ति भूखा न सोए। इसके साथ ही पेयजल की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

​जिला प्रशासन द्वारा सभी 25 प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत किट वितरित की गई। इस किट में दैनिक जीवन की अनिवार्य वस्तुएं शामिल थीं, जैसे:

  • खाद्यान्न सामग्री: आटा, चावल, दाल, तेल, मसाले, आलू और प्याज।
  • दैनिक उपयोगी वस्तुएं: बिस्कुट, कपड़े धोने व नहाने का साबुन।
  • घरेलू उपकरण: बाल्टी, मग, टोकरी और वस्त्र।

​जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिन परिवारों की गृहस्थी पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, उन्हें तत्काल बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री संकट राहत कोष और आपदा प्रबंधन के नियमों के तहत पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता भी जल्द ही उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

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